➤ अनुबंध पर कार्यरत महिला कर्मचारियों को भी मिलेगा मातृत्व अवकाश का अधिकार
➤ हाईकोर्ट ने कहा- अनुबंध में प्रावधान नहीं होने पर भी नहीं रोका जा सकता लाभ
➤ 80 दिन की सेवा पूरी करने वाली महिलाओं को 26 सप्ताह तक सवैतनिक अवकाश मिलेगा
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर कार्यरत महिला कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करते हुए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मातृत्व अवकाश प्रत्येक महिला कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है और केवल सेवा अनुबंध में इसका उल्लेख न होने के आधार पर किसी भी महिला को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने संबंधित विभाग को याचिकाकर्ता को पूरे वेतन के साथ मातृत्व अवकाश देने के निर्देश भी दिए हैं।
न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने यह फैसला ईसीएचएस सेल कसौली में क्लर्क के पद पर कार्यरत रंजना की याचिका पर सुनाया। रंजना ने मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था, लेकिन विभाग ने यह कहते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया कि उनके अनुबंध में मातृत्व अवकाश का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा-27 के तहत मातृत्व अवकाश एक वैधानिक अधिकार है। यह अधिकार किसी सेवा अनुबंध या समझौते की शर्तों पर निर्भर नहीं करता। अदालत ने कहा कि गर्भवती महिला कर्मचारियों को मातृत्व लाभ उपलब्ध कराना नियोक्ता की कानूनी जिम्मेदारी है और किसी भी प्रशासनिक या अनुबंधीय शर्त के आधार पर इसे सीमित नहीं किया जा सकता।
अदालत ने विभाग द्वारा जारी उन दोनों पत्रों को रद्द कर दिया, जिनके माध्यम से रंजना को मातृत्व अवकाश देने से इनकार किया गया था। साथ ही संबंधित विभाग को निर्देश दिए कि उन्हें तत्काल पूरे वेतन के साथ मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय और ईसीएचएस महानिदेशक द्वारा वर्ष 2019 में जारी दिशा-निर्देशों का भी संज्ञान लिया। इन निर्देशों के अनुसार नियमित और अनुबंध पर कार्यरत महिला कर्मचारियों को, यदि उन्होंने किसी वर्ष में कम से कम 80 दिन की सेवा पूरी की हो, तो अधिकतम 26 सप्ताह का सवैतनिक मातृत्व अवकाश दिया जा सकता है।
अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता रंजना वर्ष 2014 से लगातार अनुबंध पर सेवाएं दे रही हैं, इसलिए वह निर्धारित पात्रता पूरी करती हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल मातृत्व अवकाश मांगने के कारण किसी महिला कर्मचारी को उसके वैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
यह फैसला हिमाचल प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में अनुबंध पर कार्यरत महिला कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है। इससे कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकार, समानता और सामाजिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी तथा भविष्य में ऐसे मामलों में महिलाओं को कानूनी संरक्षण प्राप्त करने का रास्ता और स्पष्ट होगा।



